Team India 1983 World Cup : टीम इंडिया का पहला कप, आज के दिन मिली थी जित, 40 साल हुए पुरे

दोस्तों आज भारतीय टीम के लिए एक बहुत ही यादगार दिन है क्यूंकि Team India 1983 World Cup आज ही के दिन जीती थी आज से ठीक 40 साल पहले! इस क्षण और उन सभी खिलाड़ियों जिन्होंने उस फाइनल मैच में अपना योगदान देते हुए भारत को जित दिलाई थी उनको tribute देते हुए Team India 1983 World Cup के कुछ ऐसे यादगार और अनसुने पलो के बारे में आपको बताते है, आइये जानते है:

Lords में कोई एंट्री पास नहीं थे

टूर्नामेंट से पहले टीम इंडिया को लॉर्ड्स के मैदान पर एंट्री नहीं मिली. टीम इंडिया को जो पास मिले उससे उन्हें लॉर्ड्स में प्रवेश की इजाजत नहीं मिली. जब टीम इंडिया फाइनल में पहुंची तो फिर से स्पेशल पास बनाए गए.

Tickets दोबारा बुक किए गए

1983 विश्व कप से टीम इंडिया की वापसी के टिकट 4 August के लिए बुक किए गए थे, लेकिन एक बार जब उन्होंने जिम्बाब्वे को हरा दिया, तो टीम मैनेजर को उन्हें रद्द करना पड़ा। चूंकि भारत फाइनल में पहुंच सकता था, इसलिए टिकट 25 जून के बाद के कराए गए.

लता मंगेशकर ने किया था Concert

Team India 1983 World Cup: टीम इंडिया के सम्मान के लिए. जब पैसों की जरूरत पड़ी तो गायिका लता मंगेशकर आगे आईं। उन्होंने एक संगीत कार्यक्रम आयोजित करके धन जुटाया। कुल एक लाख रुपये इकट्ठा हुए जो विश्व कप में हिस्सा लेने वाले 14 क्रिकेटरों को दिए गए.

कपिल देव का All-rounder प्रदर्शन

Team India 1983 World Cup: कपिल देव ने 1983 विश्व कप में भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसमें जिम्बाब्वे के खिलाफ सिर्फ 138 गेंदों पर 175 रन की ऐतिहासिक पारी भी शामिल थी। कपिल ने टीम को बल्लेबाजी की विफलता से बचाया और फिर भारत के गेंदबाजी प्रयास में भी बड़ी भूमिका निभाई, जहां टीम जिम्बाब्वे को 235 रनों पर आउट करने में सफल रही।

गावस्कर ने मजाक में कहा कि जीत के बाद उन पलों को शब्दों में बयां करना मुश्किल है. यह टूथपेस्ट के लिए एक बेहतरीन विज्ञापन बन सकता था क्योंकि हमारे आस-पास हर कोई हंस रहा था और मुस्कुरा रहा था और यह देखना दिल को छू लेने वाला था।

अंग्रेजी पत्रकार का लिखा लेख चबाना पड़ा!

1983 वर्ल्ड कप जीत में टीम मैनेजर पीआर मानसिंह का भी काफी योगदान था. मानसिंह से जुड़ी कई कहानियां हैं, जिनका जिक्र बार-बार किया जाता है। जब विश्व कप शुरू हो रहा था, तो विजडन के संपादक डेविड फ्रिथ ने अपनी पत्रिका के लिए एक कहानी लिखी। इसमें उन्होंने कहा कि भारत, जिम्बाब्वे जैसी टीमों को विश्व कप में भाग नहीं लेना चाहिए, क्योंकि ऐसी टीमें नहीं जानती कि कैसे खेलना है, वे सिर्फ समय बर्बाद करने के लिए टूर्नामेंट में हैं।

पीआर मानसिंह ने भी ये आर्टिकल पढ़ा, जब Team India 1983 World Cup जीती तो उन्होंने डेविड फ्रिथ को लेटर लिखा. पीआर मानसिंह ने कहा कि आपने विश्व कप से पहले हमारी टीम के लिए यह कहा था, अब जब हमने यह विश्व कप जीत लिया है तो आप क्या कहेंगे? यह पत्र डेविड तक पहुंचा, इसके जवाब में उसने जो किया वह यादगार था।

वर्ल्ड कप ख़त्म होने के कुछ देर बाद एक और आर्टिकल लिखा गया, जिसमें डेविड फ्रिथ की तस्वीर छुपी हुई थी. एक हाथ में कॉफ़ी, दूसरे हाथ में कुछ खाते हुए की तस्वीर और लेख का शीर्षक ‘eating words’. डेविड फ्रिथ ने लिखा कि भारतीय टीम के मैनेजर ने मुझे अपने शब्द चबाने पर मजबूर कर दिया.

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